UP Board 12th Class Chemistry NCERT Hindi Medium Solution Chapter - 1 The Solid State (ठोस अवस्था)

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UP Board Chemistry Solution

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Exercise
प्रश्न 1.
ठोस कठोर क्यों होते हैं?
उत्तर
ठोस कठोर होते हैं, क्योंकि इनके अवयवी कण अत्यन्त निविड संकुलित होते हैं। इनमें कोई स्थानान्तरीय गति नहीं होती है तथा ये केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर कम्पन कर सकते हैं।
प्रश्न 2.
ठोसों का आयतन निश्चित क्यों होता है?
उत्तर
ठोस के अवयवी कणों की स्थिति नियत होती है तथा वे गति के लिए स्वतन्त्र नहीं होते हैं। इसलिए इनका आयतन निश्चित होता है।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित को अक्रिस्टलीय तथा क्रिस्टलीय ठोसों में वर्गीकृत कीजिए पॉलियूरिथेन, नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, टेफ्लॉन, पोटैशियम नाइट्रेट, सेलोफेन, पॉलिवाइर्निल क्लोराइड, रेशा काँच, ताँबा।
उत्तर
अक्रिस्टलीय ठोस – पॉलियूरिथेन, फ्लॉन, सेलोफेन, पॉलिवाइनिल, क्लोराइड, रेशा काँच।
क्रिस्टलीय ठोस – नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, पोटैशियम नाइट्रेट, ताँबा।
प्रश्न 4.
काँच को अतिशीतित द्रव क्यों माना जाता है?
उत्तर
क्योंकि यह ठोस होते हुए भी द्रवों के कुछ गुण प्रदर्शित करता है। द्रवों के समान इसमें प्रवाहित होने का गुण होता है। इसका यह गुण पुरानी इमारतों के काँच में देखा जा सकता है जो तली पर कुछ मोटा होता है। यह केवल तभी सम्भव है जबकि यह अत्यन्त मन्द गति से द्रवों के समान प्रवाहित हो।
प्रश्न 5.
एक ठोस के अपवर्तनांक का मान सभी दिशाओं में समान प्रेक्षित होता है। इस ठोस की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए। क्या यह विदलन गुण प्रदर्शित करेगा?
उत्तर
चूँकि ठोस के अपवर्तनांक का मान सभी दिशाओं में समान है। अत: यह समदेशिक प्रकृति का है। अतः यह अक्रिस्टलीय ठोस है। यह स्वच्छ विदलने गुण प्रदर्शित नहीं करेगा।
प्रश्न 6.
उपस्थित अन्तराआण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर निम्नलिखित ठोसों को विभिन्न संवर्गों में वर्गीकृत कीजिए-पोटैशियम सल्फेट, टिन, बेंजीन, यूरिया, अमोनिया, जल, जिंक सल्फाइड, ग्रेफाइट, रूबिडियम, आर्गन, सिलिकन कार्बाइड।
उत्तर
पोटैशियम सल्फेट = आयनिक, टिन = धात्विक, बेंजीन = आण्विक (अध्रुवीय), यूरिया = आण्विक (ध्रुवीय), अमोनिया = आण्विक (हाइड्रोजन आबन्धित), जल = आण्विक (हाइड्रोजन आबन्धित), जिंक सल्फाइड = आयनिक, ग्रेफाइट = सहसंयोजी, रूबिडियम = धात्विक, आर्गन = आण्विक (अध्रुवीय), सिलिकन कार्बाइड = सहसंयोजी या नेटवर्क।
प्रश्न 7.
ठोस A, अत्यधिक कठोर तथा ठोस एवं गलित अवस्थाओं में विद्युतरोधी है और अत्यन्त उच्च दाब पर पिघलता है। यह किस प्रकार का ठोस है?
उत्तर
सहसंयोजी अथवा नेटवर्क ठोस, जैसे- SiC
प्रश्न 8.
आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत चालक होते हैं, परन्तु ठोस अवस्था में नहीं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर
गलित अवस्था में आयनिक यौगिक वियोजित होकर मुक्त आयन देते हैं तथा विद्युत चालन करते हैं। ठोस अवस्था में आयन गति करने के लिए मुक्त नहीं होते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में विद्युत चालन नहीं करते हैं।
प्रश्न 9.
किस प्रकार के ठोस विद्युत चालक, आघातवर्थ्य और तन्य होते हैं?
उत्तर
धात्विक ठोस।
प्रश्न 10.
‘जालक बिन्द’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
प्रत्येक जालक बिन्दु ठोस के एक अवयवी कण को प्रदर्शित करता है। अवयवी कण परमाणु, अणु या आयन हो सकते हैं। किसी विशेष क्रिस्टलीय ठोस की आकृति के लिए जालक बिन्दु उत्तरदायी होते हैं।
प्रश्न 11.
एकक कोष्ठिका को अभिलक्षणित करने वाले पैरामीटरों के नाम बताइए।
उत्तर
  1. एकक कोष्ठिका की कोर की विमाएँ (a, b,c) – परस्पर लम्बवत् हो सकती हैं अथवा नहीं।
  2. कोरों के मध्य के कोण (a,B तथा γ)
प्रश्न 12.
निम्नलिखित में विभेद कीजिए –
  1. षट्कोणीय और एकनताक्ष एकक कोष्ठिका
  2. फलक केन्द्रित तथा अंत्य-केन्द्रित एकक कोष्ठिका।
उत्तर
  1. षट्कोणीय एकक कोष्ठिका में,
    a = b ≠ c; α = β = 90° तथा γ = 120°
    एकनताक्ष एकक कोष्ठिका में
    a ≠ b ≠ c तथा α = γ = 90° तथा β = 90°
  2. fcc में अवयवी कण सभी 8 कोनों एवं सभी 6 फलकों के केन्द्रों पर व्यवस्थित होते हैं। अंत्य- केन्द्रित एकक कोष्ठिका में अवयवी कण सभी 8 कोनों तथा दो विपरीत फलकों के केन्द्रों पर स्थित होते हैं।
प्रश्न 13.
स्पष्ट कीजिए कि एक घनीय एकक कोष्ठिका के
  1. कोने और
  2. अन्तःकेन्द्र पर उपस्थित परमाणु का कितना भाग सन्निकट कोष्ठिका से सहभाजित होता है?
उत्तर
  1. कोने पर उपस्थित परमाणु 8 एकक कोष्ठिकाओं से सहभाजित होता है। अतः एक एकक कोष्ठिका के लिए इसका योगदान 1/8 होता है।
  2. अन्त:केन्द्र पर उपस्थित परमाणु किसी भी अन्य एकक कोष्ठिका द्वारा सहभाजित नहीं होता है।
प्रश्न 14.
एक अणु की वर्ग निविड संकुलित परत में द्विविमीय उप-सहसंयोजन संख्या क्या होगी?
उत्तर
द्विविमीय निविड संकुलित परत में परमाणु 4 सन्निकट परमाणुओं को स्पर्श करता है अत: इसकी उप-सहसंयोजन संख्या 4 होगी।
प्रश्न 15.
एक यौगिक षट्कोणीय निविड़ संकुलित संरचना बनाता है। इसके 0.5 मोल में रिक्तियों की संख्या कितनी होगी? उनमें से कितनी रिक्तियाँ चतुष्फलकीय हैं?
हल
यौगिक के 0.5 मोल में परमाणुओं की संख्या = 0.5 x 6.022 x 1023
= 3.011 x 1023
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = संकुलन में परमाणुओं की संख्या
= 3.011 x 1023
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 2 x संकुलन में परमाणुओं की संख्या
= 2 x 3.011 x 1023 = 6.022 x 1023
∴ रिक्तियों की कुल संख्या = (3.011 + 6.022) x 1023
= 9.033 x 1023
प्रश्न 16.
एक यौगिक दो तत्त्वों M तथा N से बना है। तत्त्व N, ccp संरचना बनाता है और M के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के 1/3 भाग को अध्यासित करते हैं। यौगिक का सूत्र क्या है।
हल
माना ccp में N परमाणु = n
∴ चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 2n
चूँकि M परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों का 1/3 भाग घेरते हैं।
अतः M परमाणुओं की संख्या = \frac { 2n }{ 3 }
M : N = \frac { 2n }{ 3 } : n = 2 : 3
अत: सूत्र M2N2 होगा।
प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से किस जालक में उच्चतम संकुलन क्षमता है?
  1. सरल घनीय,
  2. अन्तः केन्द्रित घन और
  3. षट्कोणीय निविड संकुलित जालक।
उत्तर
संकुलन क्षमताएँ निम्न हैं –
  1. सरल घनीय = 52.4%,
  2. अन्तः केन्द्रित घनीय = 68%,
  3. षट्कोणीय निविड संकुलित = 74%
अतः षट्कोणीय निविड संकुलित व्यवस्था में अधिकतम संकुलन क्षमता होती है।
प्रश्न 18.
एक तत्त्व का मोलर द्रव्यमान 2.7 x 10-2 kg mol-1 है। यह 405 pm लम्बाई की भुजा वाली घनीय एकक कोष्ठिका बनाता है। यदि उसका घनत्व 2.7 x 103 kg m-3 हो तो घनीय एकक कोष्ठिका की प्रकृति क्या होगी?
हल
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State Q.18
चूँकि प्रति एकक कोष्ठिका में तत्त्व के चार परमाणु हैं, अत: घनीय एकक कोष्ठिका फलक-केन्द्रित (fcc) या घनीय निविड संकुलित होगी।
प्रश्न 19.
जब एक ठोस को गर्म किया जाता है तो किस प्रकार का दोष उत्पन्न हो सकता है? इससे कौन-से भौतिक गुण प्रभावित होते हैं और किस प्रकार?
उत्तर
रिक्तिका दोष; गर्म करने पर ठोस के कुछ परमाणु अथवा आयन जालक स्थल को पूर्णतः छोड़ देते। हैं। परमाणुओं अथवा आयनों के क्रिस्टल को पूर्णतः छोड़ने के कारण पदार्थ का घनत्व कम हो जाता है।
प्रश्न 20.
निम्नलिखित किस प्रकार का स्टॉइकियोमीट्री दोष दर्शाते हैं?
  1. ZnS
  2. AgBr
उत्तर
  1. फ्रेंकेल दोष
  2. फ्रेंकेल तथा शॉटकी दोष दोनों।
प्रश्न 21.
समझाइए कि एक उच्च संयोजी धनायन को अशुद्धि की तरह मिलाने पर आयनिक ठोस में रिक्तिकाएँ किस प्रकार प्रविष्ट होती हैं?
उत्तर
विद्युत उदासीनता बनाए रखने के लिए उच्च संयोजकता वाले धनायन द्वारा निम्न संयोजकता वाले दो या अधिक धनायन प्रतिस्थापित होते हैं। अत: कुछ धनायन रिक्तियाँ जनित होती हैं, जैसे- यदि आयनिक ठोस Na+ cl में Sr2+ की अशुद्धि मिलाई जाती है तब दो Na+ जालक बिन्दु रिक्त हो जाते हैं तथा इनमें से एक Sr2+ आयन द्वारा घिर जाती है तथा अन्य रिक्त रहती हैं।
प्रश्न 22.
जिन आयनिक ठोसों में धातु आधिक्य दोष के कारण ऋणायनिक रिक्तिका होती हैं, वे रंगीन होते हैं। उपयुक्त उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
इसको सोडियम क्लोराइड (Na+ cl) का उदाहरण लेकर समझा सकते हैं। जब इसके क्रिस्टलों को सोडियम वाष्प की उपस्थिति में गर्म करते हैं तब कुछ Cl आयन अपने जालक स्थलों को छोड़कर सोडियम से संयुक्त होकर NaCl बना लेते हैं। इस अभिक्रिया के होने के लिए सोडियम परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर Na+ आयन बनाते हैं। ये इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल में विसरित होकर Cl आयनों द्वारा जनित ऋणायनिक रिक्तिकाओं को घेर लेते हैं। क्रिस्टल में अब सोडियम का आधिक्य होता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा घेरे गए स्थल F- केन्द्र कहलाते हैं। ये क्रिस्टल को पीला रंग प्रदान करते हैं, क्योंकि वे दृश्य प्रकाश की ऊर्जा का अवशोषण करके उत्तेजित हो जाते हैं।
प्रश्न 23.
वर्ग 14 के तत्त्व को n- प्रकार के अर्द्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि द्वारा अपमिश्रित करके रूपान्तरित करना है। यह अशुद्धि किस वर्ग से सम्बन्धित होनी चाहिए?
उत्तर
अशुद्धि वर्ग 15 से सम्बन्धित होनी चाहिए।
प्रश्न 24.
किस प्रकार के पदार्थों से अच्छे स्थायी चुम्बक बनाए जा सकते हैं-
लौहचुम्बकीय अथवा फेरीचुम्बकीय? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
उत्तर
लौहचुम्बकीय पदार्थ श्रेष्ठ स्थायी चुम्बक बनाते हैं क्योंकि इनमें धातु आयन छोटे क्षेत्रों में व्यवस्थित होते हैं, जिन्हें डोमेन कहते हैं। प्रत्येक डोमेन सूक्ष्म चुम्बक के रूप में कार्य करता है। ये डोमेन अनियमित रूप में व्यवस्थित होते हैं। जब इन पर चुम्बकीय क्षेत्र आरोपित किया जाता है तब वे चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं तथा प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र बनाते हैं। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के हटा लेने पर भी डोमेन व्यवस्थित रहते हैं। इस प्रकार लौहचुम्बकीय पदार्थ स्थायी चुम्बक में परिवर्तित हो जाता है।
अतिरिक्त अभ्यास
प्रश्न 1.
‘अक्रिस्टलीय पद को परिभाषित कीजिए। अक्रिस्टलीय ठोसों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर
ऐसे ठोस जिनका निश्चित ज्यामितीय आकार या विन्यास नहीं होता है अर्थात् इनके अवयवी कण निश्चित क्रम में व्यवस्थित नहीं होते हैं, अक्रिस्टलीय ठोस (amorphous solids) कहलाते हैं। इनका कोई निश्चित गलनांक नहीं होता है तथा ये समदैशिक (isotropic) होते हैं; जैसे, प्लास्टिक, काँच आदि।
प्रश्न 2.
काँच, क्वार्टज जैसे ठोस से किस प्रकार भिन्न है? किन परिस्थितियों में क्वार्टज को काँच में रूपान्तरित किया जा सकता है?
उत्तर
काँच अक्रिस्टलीय ठोस है। इसमें अवयवी कणों (SiO4 चतुष्क) की केवल लघु परासी व्यवस्था होती है। दूसरी ओर क्वार्ट्ज में अवयवी कणों (SiO4 चतुष्क) की लघु और दीर्घ (दोनों) परासी व्यवस्थाएँ होती हैं। दूसरे शब्दों में, क्वार्ज क्रिस्टलीय होता है।
क्वार्ट्ज़ को पिघलाकर उसे शीघ्रता से ठंडा करने पर काँच प्राप्त होता है।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित ठोसों का वर्गीकरण आयनिक, धात्विक, आण्विक, सहसंयोजक या अक्रिस्टलीय में कीजिए।
  1. टेट्राफॉस्फोरस डेकॉक्साइड (P4O10)
  2. अमोनियम फॉस्फेट (NH4)3 PO4
  3. SiC
  4. I2
  5. P4
  6. प्लास्टिक
  7. ग्रेफाइट
  8. पीतल
  9. Rb
  10. LiBr
  11. Si
उत्तर
  1. आयनिक (Ionic) : अमोनियम फॉस्फेट (NH4)3 PO4, LiBr
  2. धात्विक (Metallic) : पीतल, Rb
  3. आण्विक (Molecular) : टेट्राफॉस्फोरस डेकॉक्साइड (P4O10), I2, P4
  4. सहसंयोजक (Covalent) : ग्रेफाइट, SiC, Si
  5. अक्रिस्टलीय (Amorphous) : प्लास्टिक
प्रश्न 4.
  1. उपसहसंयोजन संख्या का क्या अर्थ है?
  2. निम्नलिखित में परमाणुओं की उपसहसंयोजन संख्या क्या है?
    1. एक घनीय निविड संकुलित संरचना
    2. एक अन्त:केन्द्रित घनीय संरचना।
उत्तर
  1. उप-सहसंयोजन संख्या – यदि परमाणुओं को गोलों के रूप में प्रदर्शित किया जाए, तब किसी विशेष गोले के सन्निकट उपस्थित अन्य गोलों की संख्या उसकी उप-सहसंयोजन संख्या कहलाती है। आयनिक क्रिस्टलों में किसी आयन के चारों ओर उपस्थित विपरीत आवेशित गोलों की संख्या उसकी उप-सहसंयोजन संख्या कहलाती है।।
    1. 12
    2. 8.
प्रश्न 5.
यदि आपको किसी अज्ञात धातु का घनत्व एवं एकक कोष्ठिका की विमाएँ ज्ञात हैं तो क्या आप उसके परमाण्विक द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
परमाण्विक द्रव्यमान, M = \frac { \rho \times { a }^{ 3 }\times { N }_{ A } }{ Z }
किसी अज्ञात धातु का घनत्व एवं एकक कोष्ठिका की विमाएँ ज्ञात होने पर उपर्युक्त सूत्र की सहायता से उसके परमाण्विक द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।
प्रश्न 6.
‘किसी क्रिस्टल की स्थिरता उसके गलनांक के परिमाण द्वारा प्रकट होती है।’ टिप्पणी कीजिए। किसी आँकड़ा पुस्तक से जल, एथिल ऐल्कोहॉल, डाइएथिल ईथर तथा मेथेन के गलनांक एकत्र करें। इन अणुओं के मध्य अन्तराआण्विक बलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
उत्तर
किसी पदार्थ का गलनांक जितना उच्च होता है उसके अवयवी कणों के मध्य आकर्षण बल उतना ही अधिक होता है और पदार्थ भी उतना ही अधिक स्थायी होता है। जल, एथिल ऐल्कोहॉल, डाइएथिल ईथर और मेथेन के गलनांक क्रमशः 273 K, 155.7 K, 156.8 K और 90.5 K हैं। जल और एथिल ऐल्कोहॉल में अंतराआण्विक बल हाइड्रोजन आबंधन होते हैं। जल के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंधन एथिल ऐल्कोहॉल के अणुओं की तुलना में प्रबल होता है जोकि उनके गलनांकों से भी स्पष्ट होता है। डाइएथिल ईथर के अणुओं के बीच द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण होता है तथा मेथेन अणुओं के मध्य यह दुर्बल वाण्डरवाल्स बल होता है जो कि इनके गलनांकों से स्पष्ट है।
प्रश्न 7.
निम्नलिखित युगलों के पदों (शब्दों) में कैसे विभेद करोगे?
  1. षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
  2. क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका
  3. चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति।
उत्तर
1. षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
(Hexagonal Close Packing and Cubic Close Packing)
ये दोनों त्रिविमीय निविड संकुलित संरचनाएँ द्विविम-षट्कोणीय निविड संकुलित परतों को एक-दूसरे पर रखकर जनित की जा सकती हैं।
षट्कोणीय निविड संकुलन – जब तृतीय परत को द्वितीय परत पर रखा जाता है, तब उत्पन्न एक सम्भावना के अन्तर्गत द्वितीय परत की चतुष्फलकीय रिक्तियों को तृतीय परत के गोलों द्वारा आच्छादित किया जा सकता है। इस स्थिति में तृतीय परत के गोले प्रथम परत के गोलों के साथ पूर्णत: संरेखित होते हैं। इस प्रकार गोलों का पैटर्न एकान्तर परतों में पुनरावृत्त होता है। इस पैटर्न को प्रायः ABAB….पैटर्न लिखा जाता है। इस संरचना को षट्कोणीय निविड संकुलित (hcp) संरचना कहते हैं (चित्र-1)। इस प्रकार की परमाणुओं की व्यवस्था कई धातुओं; जैसे- मैग्नीशियम और जिंक में पायी जाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.1
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.2
घनीय निविड संकुलन – इसके लिए तीसरी परत दूसरी परत के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि उसके गोले अष्टफलकीय रिक्तियों को आच्छादित करते हों। इस प्रकार से रखने पर तीसरी परत के गोले प्रथम अथवा द्वितीय किसी भी परत के साथ संरेखित नहीं होते। इस व्यवस्था को ‘C’ प्रकार का कहा जाता है। केवल चौथी परत रखने पर उसके गोले प्रथम परत के गोलों के साथ संरेखित होते हैं। जैसा चित्र-1 व 2 में दिखाया गया है। इस प्रकार के पैटर्न को प्रायः ABCABC… लिखा जाता है। इस संरचना को घनीय निविड संकुलित संरचना (ccp) अथवा फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना कहा जाता है। धातु; जैसे- ताँबा तथा चाँदी इस संरचना में क्रिस्टलीकृत होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.3
उपर्युक्त दोनों प्रकार के निविड़ संकुलन अति उच्च क्षमता वाले होते हैं और क्रिस्टल का 74% स्थान सम्पूरित रहता है। इन दोनों में प्रत्येक गोला बारह गोलों के सम्पर्क में रहता है। इस प्रकार इन दोनों संरचनाओं में उपसहसंयोजन संख्या 12 है।
2. क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका
(Crystal Lattice and Unit Cell)
क्रिस्टल जालक – क्रिस्टलीय ठोसों का मुख्य अभिलक्षण अवयवी कणों का नियमित और पुनरावृत्त पैटर्न है। यदि क्रिस्टल में अवयवी कणों की त्रिविमीय व्यवस्था को आरेख के रूप में निरूपित किया जाए, जिसमें प्रत्येक बिन्दु को चित्रित किया गया हो तो व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं। इस प्रकार, “द्विकस्थान (space) में बिन्दुओं की नियमित त्रिविमीय व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं।”
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.4
क्रिस्टल जालक के एक भाग को चित्र- 3 में दिखाया गया है। केवल 14 त्रिविमीय जालक सम्भव हैं।
एकक कोष्ठिका – एकक कोष्ठिका क्रिस्टल जालक का लघुतम भाग है (चित्र-3)। जब इसे विभिन्न दिशाओं में पुनरावृत्त किया जाता है तो पूर्ण जालक की उत्पत्ति होती है।
3. चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति
(Tetrahedral Void and Octahedral Void)
चतुष्फलकीय रिक्ति – ये रिक्तियाँ चार गोलों द्वारा घिरी रहती हैं जो एक नियमित चतुष्फलक के शीर्ष पर स्थित होते हैं। इस प्रकार जब भी द्वितीय परत का एक गोला प्रथम परत की रिक्ति के ऊपर होता है, तब एक चतुष्फलकीय रिक्ति बनती है। इन रिक्तियों को चतुष्फलकीय रिक्तियाँ इसलिए कहा जाता है। क्योंकि जब इन चार गोलों के केन्द्रों को मिलाया जाता है, तब एक चतुष्फलक बनता है। चित्र-4 में इन्हें “T’ से अंकित किया गया है। ऐसी एक रिक्ति को अलग से चित्र-5 में दिखाया गया है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.5
अष्टफलकीय रिक्ति – ये रिक्तियाँ सम्पर्क में स्थित तीन गोलों द्वारा संलग्नित रहती हैं। इस प्रकार द्वितीय परत की त्रिकोणीय रिक्तियाँ प्रथम परते की त्रिकोणीय रिक्तियों के ऊपर होती हैं और इनकी त्रिकोणीय आकृतियाँ अतिव्यापित नहीं होतीं। उनमें से एक में त्रिकोण का शीर्ष ऊर्ध्वमुखी और दूसरे में अधोमुखी होता है। इन रिक्तियों को चित्र-4 में ‘O’ से अंकित किया गया है। ऐसी रिक्तियाँ छह गोलों से घिरी होती हैं। ऐसी एक रिक्ति को अलग से चित्र- 5 में दिखाया गया है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.7.6
प्रश्न 8.
निम्नलिखित जालकों में से प्रत्येक की एकक कोष्ठिका में कितने जालक बिन्दु होते हैं?
  1. फलक-केन्द्रित घनीय,
  2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय,
  3. अन्तःकेन्द्रित।
उत्तर
  1. फलक-केन्द्रित घनीय संरचना (fcc) में जालक बिन्दु
    = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14
  2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय संरचना में जालक बिन्दु
    = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14
  3. अन्त:केन्द्रित घनीय (bcc) संरचना में जालक बिन्दु
    = 8 (कोनों पर) + 1 (अन्त:केन्द्र पर) = 9
प्रश्न 9.
समझाइए –
  1. धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता एवं विभेद का आधार।
  2. आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं।
उत्तर
1. समानताएँ (Similarities) – (1) आयनिक तथा धात्विक दोनों क्रिस्टलों में स्थिर विद्युत आकर्षण बल विद्यमान होता है। आयनिक क्रिस्टलों में यह विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य होता है। धातुओं में यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों तथा करनैल (kernels) के मध्य होता है। इसी कारण से इन दोनों के गलनांक उच्च होते हैं।
(2) दोनों स्थितियों में बन्ध अदैशिक (non-directional) होता है।
विभेद (Differences) – (1) आयनिक क्रिस्टलों में आयन गति के लिए स्वतन्त्र नहीं होते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते। ये ऐसा केवल गलित अवस्था या जलीय विलयन में करते हैं। धातुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉन बँधे नहीं होते, अपितु मुक्त रहते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में भी विद्युत का चालन करते हैं।
(2) आयनिक बन्ध स्थिर विद्युत आकर्षण के कारण प्रबल होते हैं। धात्विक बन्ध दुर्बल भी हो सकता है। या प्रबल भी, यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा करनैल के आकार पर निर्भर करता है।
2. आयनिक क्रिस्टल कठोर होते हैं क्योंकि इनमें विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य प्रबल स्थिर विद्युत आकर्षण बल उपस्थित होता है। ये भंगुर होते हैं क्योंकि आयनिक बन्ध अदिशात्मक होता है।
प्रश्न 10.
निम्नलिखित के लिए धातु के क्रिस्टल में संकुलन क्षमता की गणना कीजिए।
  1. सरल घनीय,
  2. अन्त:केन्द्रित घनीय,
  3. फलक-केन्द्रित घनीय।
(यह मानते हुए कि परमाणु एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं।)
उत्तर
1. सरल घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Simple Cubic Lattice)
सरल घनीय जालक में परमाणु केवल घन के कोनों पर उपस्थित होते हैं। घन के किनारों (कोरों) पर कण एक-दूसरे के सम्पर्क में होते हैं (चित्र-6)। इसलिए घन के कोर अथवा भुजा की लम्बाई ‘a’ और प्रत्येक कण का अर्द्धव्यास r निम्नलिखित प्रकार से सम्बन्धित होता है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.1
a = 2r
घनीय एकक कोष्ठिका का आयतन = a3 = (2r)3 = 8r3
चूँकि सरल घनीय एकक कोष्ठिका में केवल 1 परमाणु होता है।
अतः अध्यासित दिक्स्थान का आयतन = 4/3 πr3
∴ संकुलन क्षमता
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.2
2. अन्तः केन्द्रित घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Body-centred Cubic Lattice)
संलग्न चित्र से यह स्पष्ट है कि केन्द्र पर स्थित परमाणु विकर्ण पर व्यवस्थित अन्य दो परमाणुओं के सम्पर्क में है।
Δ EFD में,
b2 = a2 + a2 = 2a2
b = √2a
अब Δ AFD में,
c2 = a2 + b2 = a2 + 2a2 = 3a2
c= √3a
काय विकर्ण 4r की लम्बाई 47 के बराबर है, जहाँ r गोले (परमाणु) का अर्द्धव्यास है क्योंकि विकर्ण पर उपस्थित तीनों गोले एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं। अतः
√3a = 4r
a = \frac { 4 }{ \sqrt { 3 } }  r
अतः यह भी लिख सकते हैं कि r = \frac { \sqrt { 3 } }{ 4 }  a
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.3
इस प्रकार की संरचना में परमाणुओं की कुल संख्या 2 है तथा उनका आयतन 2 x (4/3) πr3 है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.4
3. फलक-केन्द्रित घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Face-centred Cubic Lattice)
संलग्न चित्र से, Δ ABC में,
AC2 = b2 = BC2 + AB2
= a2 + a2 = 2a2
या  b = √2a
यदि गोले का अर्द्धव्यास r हो तो
b= 4r = √2a
या  a = \frac { 4r }{ \sqrt { 2 } }  = 2√2r
या  r = \frac { a }{ 2\sqrt { 2 } }
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.5
इस प्रकार की संरचना में परमाणुओं की कुल संख्या चार होती है तथा उनका आयतन 4 x \frac { 4 }{ 3 }  πr3 है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.6
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.10.7
प्रश्न 11.
चाँदी का क्रिस्टलीकरण fcc जालक में होता है। यदि इसकी कोष्ठिका के कोरों की लम्बाई 4.07 x 10-8 cm तथा घनत्व 10.5 g cm-3 हो तो चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल
fcc जालक के लिए Z = 4
कोर की लम्बाई, a = 4.077 x 10-8 cm, घनत्व ρ = 10.5 g cm-3
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.11
=107.14 g mol-1
अतः चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान = 107.14 g mol-1 होगा।
प्रश्न 12.
एक घनीय ठोस दो तत्वों P एवं Q से बना है। घन के कोनों पर Q परमाणु एवं अन्तःकेन्द्र पर P परमाणु स्थित हैं। इस यौगिक का सूत्र क्या है? P एवं Q की उपसहसंयोजन संख्या क्या है?
हल
घन में परमाणु Q, 8 कोनों पर स्थित हैं।
Q परमाणुओं की संख्या = 1/8 x 8= 1
परमाणु P अन्त: केन्द्र पर स्थित है,
अतः P परमाणुओं की संख्या = 1
अतः यौगिक का सूत्र = PQ
P तथा Q की उप-सहसंयोजन संख्या = 8
प्रश्न 13.
नायोबियम का क्रिस्टलीकरण अन्तःकेन्द्रित घनीय संरचना में होता है। यदि इसका घनत्व 8.55 g cm-3 हो तो इसके परमाण्विक द्रव्यमान 93u का प्रयोग करके परमाणु त्रिज्या की गणना कीजिए।
हल
अन्त: केन्द्रित घनीय संरचना (bcc) में Z = 2, घनत्व ρ = 8.55 g cm-3, परमाण्विक द्रव्यमान,
M = 92.9 g mol-1
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.13.1
∴ a = (36.1 x 10-24 cm3)1/3 = 3.3 x 10-8 cm
bcc एकक कोष्ठिका के लिए,
विकर्ण = 4 x नायोबियम परमाणु की त्रिज्या
√3a = 4 x नायोबियम परमाणु की त्रिज्या
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.13.2
= 1.43 x 10-8 cm
प्रश्न 14.
यदि अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या हो तथा निविड संकुलन में परमाणुओं की त्रिज्या हो तो r एवं R में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
हल
अष्टफलकीय रिक्ति में स्थित गोला चित्र 9 में छायांकित वृत्त द्वारा प्रदर्शित है। रिक्ति के ऊपर तथा नीचे उपस्थित गोले चित्र-9 में प्रदर्शित नहीं हैं। अब चूंकि ABC एक समकोण त्रिभुज है, अत: पाइथागोरस सिद्धान्त लागू करने पर,
AC2 = AB2 + BC2
(2R)2 = (R + r)2 + (R + r)2
= 2(R + r)2
4R2 = 2(R + r)2
(√2R)2 = (R + r)2
√2R = R + r
r = √2R – R
r = (√2 – 1)R
r = (1.414 – 1)R
r = 0.414 R
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.14
प्रश्न 15.
कॉपर fcc जालक के रूप में क्रिस्टलीकृत होता है जिसके कोर की लम्बाई 3.61 x 10-8 cm है। यह दर्शाइए कि गणना किए गए घनत्व के मान तथा मापे गए घनत्व 8.92 g cm-3 में समानता है।
हल
fcc जालक में Z = 4, कोर की लम्बाई, a = 3.61 x 10-8 cm, घनत्व ρ = ?
कॉपर का परमाण्विक द्रव्यमान, M = 63.5 g mol-1
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.15
= 8.97 g cm-3
अतः घनत्व का गणनात्मक मान 8.97 g cm-3 तथा मापे गये घनत्व का मान 8.92 g cm-3 लगभग समान हैं।
प्रश्न 16.
विश्लेषण द्वारा ज्ञात हुआ कि निकिल ऑक्साइड का सूत्र Ni0.98 O1.00 है। निकिल आयनों का कितना अंश Ni2+ और Ni3+ के रूप में विद्यमान है?
हल
Ni0.98 O1.00 नॉन- स्टॉइकियोमीटी यौगिक है। Ni आयन तथा ऑक्साइड आयनों का संघटन 98 : 100 है। माना Ni में x Ni2+आयन तथा (98 – x) Ni3+ आयन हैं।
Ni2+ तथा Ni3+ पर उपस्थित धनावेश ऑक्साइड आयनों पर उपस्थित ऋणावेश के बराबर होगा, अतः
x × 2 + (98 – x )3 = 100 x 2
2 + 294 – 3x = 100 × 2
∴ x = 94
अत: 98 Ni आयनों में 94 Ni2+ आयन तथा 4 Ni3+ आयन होंगे।
∴ Ni2+ आयनों का प्रतिशत = \frac { 94 }{ 98 }  x 100= 96%
Ni3+ आयनों का प्रतिशत = 4%
प्रश्न 17.
अर्द्धचालक क्या होते हैं? दो मुख्य अर्द्धचालकों का वर्णन कीजिए एवं उनकी चालकता क्रियाविधि में विभेद कीजिए।
उत्तर
अर्द्धचालक (Semiconductors) – वे ठोस जिनकी चालकता 10-6 से 104 ohm-1 m-1 तक के मध्यवर्ती परास में होती है, अर्द्धचालक कहलाते हैं।
अर्द्धचालकों में संयोजक बैण्ड एवं चालक बैण्ड के मध्य ऊर्जा- अन्तराल कम होता है। अतः कुछ इलेक्ट्रॉन चालक बैण्ड में लाँघ सकते हैं और अल्प- चालकता प्रदर्शित कर सकते हैं। ताप बढ़ने के साथ अर्द्धचालकों में विद्युत- चालकता बढ़ती है, क्योंकि अधिक संख्या में इलेक्ट्रॉन चालक बैण्ड में देखे जा सकते हैं। सिलिकन एवं जर्मेनियम जैसे पदार्थ इस प्रकार का व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। इनमें उचित अशुद्धि को उपयुक्त मात्रा में मिलाने से इनकी चालकता बढ़ जाती है। इस आधार पर दो प्रकार के अर्द्धचालक तथा उनकी चालकता- क्रियाविधि का वर्णन निम्नवत् है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.17.1
(i) n- प्रकार के अर्द्धचालक (n-type semiconductors) – सिलिकन तथा जर्मेनियम आवर्त सारणी के वर्ग 14 से सम्बन्धित हैं और प्रत्येक में चार संयोजक इलेक्ट्रॉन हैं। क्रिस्टलों में इनका प्रत्येक परमाणु अपने निकटस्थ परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक बन्ध बनाता है [चित्र-11 (a)]। जब वर्ग 15 के तत्व; जैसे- P अथवा As, जिनमें पाँच संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं, को अपमिश्रित किया जाता है तो ये सिलिकन अथवा जर्मेनियम के क्रिस्टल में कुछ जालक स्थलों में आ जाते हैं [चित्र-11 (b)]। P अथवा As के पाँच में से चार इलेक्ट्रॉनों का उपयोग चार सन्निकट सिलिकन परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक बन्ध बनाने में होता है। पाँचवाँ अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन विस्थानित (delocalised) हो जाता है। यह विस्थानित इलेक्ट्रॉन अपमिश्रित सिलिकन (अथवा जर्मेनियम) की चालकता में वृद्धि करता है। यहाँ चालकता में वृद्धि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन के कारण होती है, अत: इलेक्ट्रॉन-धनी अशुद्धि से अपमिश्रित सिलिकन को n-प्रकार का अर्द्धचालक कहा जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.17.2
(ii) p- प्रकार के अर्द्धचालक (p-type semiconductors) – सिलिकन अथवा जर्मेनियम को वर्ग 13 के तत्वों; जैसे- B, Al अथवा Ga के साथ भी अपमिश्रित किया जा सकता है जिनमें केवल तीन संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं। वह स्थान जहाँ चौथा इलेक्ट्रॉन नहीं होता, इलेक्ट्रॉन रिक्ति या इलेक्ट्रॉन छिद्र कहलाता है [चित्र-11 (c)]। निकटवर्ती परमाणु से इलेक्ट्रॉन आकर इलेक्ट्रॉन छिद्र को भर सकता है, परन्तु ऐसा करने पर वह अपने मूल स्थान पर इलेक्ट्रॉन छिद्र छोड़ जाता है। यदि ऐसा हो तो यह प्रतीत होगा जैसे कि इलेक्ट्रॉन छिद्र जिस इलेक्ट्रॉन द्वारा यह भरा गया है, उसके विपरीत दिशा में चल रहा है। विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉन छिद्रों में से धनावेशित प्लेट की ओर चलेंगे, परन्तु ऐसा प्रतीत होगा; जैसे इलेक्ट्रॉन छिद्र धनावेशित हैं और ऋणावेशित प्लेट की ओर चल रहे हैं। इस प्रकार के अर्द्धचालकों को p- प्रकार के अर्द्धचालक कहते हैं।
प्रश्न 18.
नॉनस्टॉइकियोमीट्री क्यूप्रस ऑक्साइड, Cu2O प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है। इसमें कॉपर तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 से कुछ कम है। क्या आप इस तथ्य की व्याख्या कर सकते हैं कि यह पदार्थ p- प्रकार का अर्द्धचालक है?
उत्तर
Cu2O में Cu तथा O का 2 : 1 से कम अनुपात यह प्रदर्शित करता है कि इसमें धनायनिक रिक्ति के कारण धातु न्यूनता (metal deficiency) है। धातु न्यून यौगिक धनायन छिद्रों के द्वारा विद्युत चालन करते हैं। अतः p- प्रकार के अर्द्धचालक (p- type semiconductors) होते हैं।
प्रश्न 19.
फेरिक ऑक्साइड में ऑक्साइड आयन के षट्कोणीय निविड़ संकुलन में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी तीन अष्टफलकीय रिक्तियों में से दो पर फेरिक आयन उपस्थित होते हैं। फेरिक ऑक्साइड का सूत्र ज्ञात कीजिए।
हल
माना निविड संकुलित संरचना में ऑक्साइड (O2-) आयनों की संख्या = x
∴ अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = x
∴ इन रिक्तियों का 2/3 भाग फेरिक आयनों (Fe3+) द्वारा भरा है।
अत: उपस्थित Fe3+ आयनों की संख्या 2/3 × x = 2x/3
Fe3+ : O2- = 2x/3 : x = 2 : 3
अतः फेरिक ऑक्साइड का सूत्र Fe2O3 होगा।
प्रश्न 20.
निम्नलिखित को p-प्रकार या n-प्रकार के अर्द्धचालकों में वर्गीकृत कीजिए –
  1. In से डोपित Ge,
  2. Si से डोपित B
उत्तर
  1. p- प्रकार का अर्द्धचालक,
  2. n- प्रकार का अर्द्ध-चालक।
प्रश्न 21.
सोना (परमाणु त्रिज्या= 0.144 nm) फलक-केन्द्रित एकक कोष्ठिका में क्रिस्टलीकृत होता है। इसकी कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल
fcc संरचना के लिए यदि r परमाणु की त्रिज्या हो तो
फलक विकर्ण = 4r
यदि कोष्ठिका की कोर की लम्बाई a हो तो फलक विकर्ण = √2a
अतः √2a = 4r
∴ a = \frac { 4 }{ \sqrt { 2 } }  × 0.144
0.407 nm
प्रश्न 22.
बैण्ड सिद्धान्त के आधार पर
  1. चालक एवं रोधी
  2. चालक एवं अर्द्धचालक में क्या अन्तर होता है?
उत्तर
  1. चालक एवं रोधी में अन्तर (Difference between conductor and insulator) – अचालक अथवा रोधी में संयोजक बैण्ड तथा चालक बैण्ड के मध्य ऊर्जा-अन्तर बहुत अधिक होता है, जबकि चालक में ऊर्जा-अन्तर अत्यन्त कम होता है या संयोजक बैण्ड तथा चालक बैण्ड के बीच अतिव्यापन होता है।
  2. चालक एवं अर्द्धचालक में अन्तर (Difference between conductor and semiconductor) – चालक में संयोजक बैण्ड तथा चालक बैण्ड के बीच ऊर्जा-अन्तर अत्यन्त कम होता है। अथवा अतिव्यापन होता है, जबकि अर्द्धचालकों में ऊर्जा अन्तर सदैव कम ही होता है, कभी भी अतिव्यापन नहीं होता।
प्रश्न 23.
उचित उदाहरणों द्वारा निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए
  1. शॉट्की दोष
  2. फ्रेंकेल दोष
  3. अन्तराकाशी
  4. F-केन्द्र।
उत्तर
1. शॉट्की दोष (Schottky defect) – यह आधारभूत रूप से आयनिक ठोसों का रिक्तिका दोष है। जब एक परमाणु अथवा आयन अपनी सामान्य (वास्तविक) स्थिति से लुप्त हो जाता है तो एक जालक रिक्तता निर्मित हो जाती है; इसे शॉकी दोष कहते हैं। विद्युत उदासीनता को बनाए रखने के लिए लुप्त होने वाले धनायनों और ऋणायनों की संख्या बराबर होती है। शॉट्की दोष उन आयनिक पदार्थों द्वारा दिखाया जाता है जिनमें धनायन और ऋणायन लगभग समान आकार के होते हैं। उदाहरण के लिए– NaCl, KCl, CsCl और AgBr शॉट्की दोष दिखाते हैं।
2. फ्रेंकेल दोष (Frenkel defect) – यह दोष आयनिक ठोसों द्वारा दिखाया जाता है। लघुतर आयन (साधारणतया धनायन) अपने वास्तविक स्थान से विस्थापित होकर अन्तराकाश में चला जाता है। यह वास्तविक स्थान पर रिक्तिका दोष और नए स्थान पर अन्तराकाशी दोष उत्पन्न करता है। फ्रेंकेल दोष को विस्थापन दोष भी कहते हैं। यह ठोस के घनत्व को परिवर्तित नहीं करता। फ्रेंकेल दोष उन आयनिक पदार्थ द्वारा दिखाया जाता है जिनमें आयनों के आकार में अधिक अन्तर होता है। उदाहरण के लिए– ZnS, AgCl, AgBr और AgI में यह दोष Zn2+ और Ag+ आयन के लघु आकार के कारण होता है।
3. अन्तराकाशी दोष (Interstitial defect) – जब कुछ अवयवी कण (परमाणु अथवा अणु) अन्तराकोशी स्थल पर पाए जाते हैं तब उत्पन्न दोष अन्तराकाशी दोष कहलाता है। यह दोष पदार्थ के घनत्व को बढ़ाता है। अन्तराकाशी दोष अनआयनिक ठोसों में पाया जाता है। आयनिक ठोसों में सदैव विद्युत उदासीनता बनी रहनी चाहिए। इससे इनमें यह दोष दिखाई नहीं देता है।
4. F-केन्द्र (F-centre) – जब क्षारकीय हैलाइड; जैसे- NaCl को क्षार धातु (जैसे- सोडियम) की वाष्प के वातावरण में गर्म किया जाता है तो सोडियम परमाणु क्रिस्टल की सतह पर जम जाते हैं। Cl आयन क्रिस्टल की सतह में विसरित हो जाते हैं और Na+आयनों के साथ जुड़कर NaCl देते हैं। Na+ आयन बनाने के लिए Na परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाता है। निर्मुक्त इलेक्ट्रॉन विसरित होकर क्रिस्टल के ऋणायनिक स्थान को अध्यासित करते हैं, परिणामस्वरूप अब क्रिस्टल में सोडियम का आधिक्य होता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरी जाने वाली इन ऋणायनिक रिक्तिकाओं को F-केन्द्र कहते हैं। ये NaCl क्रिस्टलों को पीला रंग प्रदान करते हैं। यह रंग इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा क्रिस्टल पर पड़ने वाले प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित करके उत्तेजित होने के परिणामस्वरूप दिखता है।
प्रश्न 24.
ऐलुमिनियम घनीय निविड संकुलित संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है। इसका धात्विक अर्द्धव्यास 125 pm है।
  1. एकक कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
  2. 1.0 cm3 ऐलुमिनियम में कितनी एकक कोष्ठिकाएँ होंगी?
हल
घनीय निविड संकुलित संरचना में fcc संरचना होती है।
अतः फलक विकर्ण a√2 = 4r
1. ऐलुमिनियम की एकक कोष्ठिका की कोर की लम्बाई
a = \frac { 4 }{ \sqrt { 2 } }  × 125 pm = 353.5 pm
2. Al के 1 cm3 में एकक कोष्ठिकाओं की संख्या
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.24
प्रश्न 25.
यदि NaCl को SrCl2 के 10-3 मोल % से डोपित किया जाए तो धनायनों की रिक्तियों का सान्द्रण क्या होगा?
हल
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.25
प्रश्न 26.
निम्नलिखित को उचित उदाहरणों से समझाइए –
  1. लौहचुम्बकत्व
  2. अनुचुम्बकत्व
  3. फेरीचुम्बकत्व
  4. प्रतिलौहचुम्बकत्व
  5. 12 – 16 और 13 – 15 वर्गों के यौगिक।
उत्तर
1. लौहचुम्बकत्व (Ferromagnetism) – कुछ पदार्थ; जैसे-लोहा, कोबाल्ट, निकिल, गैडोलिनियम और CrO2 बहुत प्रबलता से चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे पदार्थों को लौहचुम्बकीय पदार्थ कहा जाता है। प्रबल आकर्षणों के अतिरिक्त ये स्थायी रूप से चुम्बकित किए जा सकते हैं। ठोस अवस्था में लौहचुम्बकीय पदार्थों के धातु आयन छोटे खण्डों में एकसाथ समूहित हो जाते हैं, इन्हें डोमेन कहा जाता है। इस प्रकार प्रत्येक डोमेन एक छोटे चुम्बक की भाँति व्यवहार करता है। लौहचुम्बकीय पदार्थ के अचुम्बकीय टुकड़े में डोमेन अनियमित रूप से अभिविन्यसित होते हैं और उनकी चुम्बकीय आघूर्ण निरस्त हो जाता है। पदार्थ को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर सभी डोमेन चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में अभिविन्यसित हो जाते हैं (चित्र-12 (a)] और प्रबल चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होती है। चुम्बकीय क्षेत्र को हटा लेने पर भी डोमेनों का क्रम बना रहता है और लौहचुम्बकीय पदार्थ स्थायी चुम्बक बन जाते हैं। चुम्बकीय पदार्थों की यह प्रवृत्ति लौहचुम्बकत्व कहलाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 1 The Solid State 2Q.26
2. अनुचुम्बकत्व (Paramagnetism) – वे पदार्थ जो चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों की यह प्रवृत्ति अनुचुम्बकत्व कहलाती है। अनुचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र की ओर दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं। ये चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में ही चुम्बकित हो जाते हैं तथा चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में अपना चुम्बकत्व खो देते हैं। अनुचुम्बकत्व का कारण एक अथवा अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति है, जो कि चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। O2, Cu2+, Fe3+, Cr3+ ऐसे पदार्थों के कुछ उदाहरण हैं।
3. फेरीचुम्बकत्व (Ferrimagnetism) – जब पदार्थ में डोमेनों के चुम्बकीय आघूर्णो का संरेखण समान्तर एवं प्रतिसमान्तर दिशाओं में असमान होता है, तब पदार्थ में फेरीचुम्बकत्व देखा जाता है। [चित्र-12 (c)]। ये लोहचुम्बकत्व की तुलना में चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं। Fe3O4 (मैग्नेटाइट) और फेराइट जैसे MgFe2O4, ZnFe2O4, ऐसे पदार्थों के उदाहरण हैं। ये पदार्थ गर्म करने पर फेरीचुम्बकत्व खो देते हैं और अनुचुम्बकीय बन जाते हैं।
4. प्रतिलौहचुम्बकत्व (Antiferromagnetism) – प्रतिलौहचुम्बकत्व प्रदर्शित करने वाले पदार्थ जैसे MnO में डोमेन संरचना लोहचुम्बकीय पदार्थ के समान होती है, परन्तु उनके डोमेन एक-दूसरे के विपरीत अभिविन्यसित होते हैं तथा एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण को निरस्त कर देते हैं [चित्र-12 (b)]। जब चुम्बकीय आघूर्ण इस प्रकार अभिविन्यासित होते हैं कि नेट चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है, तब चुम्बकत्व प्रतिलौहचुम्बकत्व कहलाता है।
5. 12 – 16 और 13 -15 वर्गों के यौगिक (Compounds of group 12-16 and 13-15) – वर्ग 12 के तत्वों और वर्ग 16 के तत्वों से बने यौगिक 12 – 16 वर्गों के यौगिक कहलाते हैं; जैसे- ZnS, HgTe आदि।
वर्ग 13 के तत्वों और वर्ग 15 के तत्वों से बने यौगिक 13 – 15 वर्गों के यौगिक कहलाते हैं; जैसे- GaAs, AlP आदि।

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